भारतीय धूसर हॉर्नबिल (इंडियन ग्रे हॉर्नबिल) की 60 वर्षों बाद गुजरात के गिर वन में सफल पुनर्स्थापना
| विषय | मुख्य तथ्य एवं प्रमुख बिंदु |
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| पुनर्स्थापित प्रजाति | भारतीय धूसर हॉर्नबिल (Indian Grey Hornbill), जो 1950–1960 के दशक से शिकार के दबाव के कारण गिर वन से लुप्त हो गई थी, का सफलतापूर्वक पुनर्स्थापन किया गया। |
| वैज्ञानिक निष्कर्ष | - शोध सहकर्मी-समीक्षित (Peer-reviewed) पत्रिका Birds में प्रकाशित हुआ।<br>- अध्ययन में आवास चयन (Habitat Choice), गृह-क्षेत्र (Home Range), घोंसला निर्माण (Nesting) तथा भोजन पारिस्थितिकी (Feeding Ecology) का विश्लेषण किया गया।<br>- अनुकूलन (Adaptation) के बाद गृह-क्षेत्र (Home Range) 61 वर्ग किमी से घटकर 5.7 वर्ग किमी रह गया। |
| पारिस्थितिक भूमिका | - यह बीज प्रसार (Seed Dispersal) करने वाली प्रमुख पक्षी प्रजाति है, जो बरगद, पीपल, करमदा एवं धरमन जैसे वृक्षों के फल खाती है।<br>- वन पुनर्जनन (Forest Regeneration), पौधों की विविधता (Plant Diversity) तथा पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन (Ecosystem Balance) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।<br>- यह कीटों का भी सेवन करती है, जिससे पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है। |
| संरक्षण साझेदार | गुजरात वन विभाग तथा विभिन्न संरक्षण संगठनों ने इस पुनर्स्थापन परियोजना का नेतृत्व किया। |

