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IVF तकनीक से भारत में पहली बार बन्नी भैंस के बछड़ा जन्म

IVF तकनीक से भारत में पहली बार बन्नी भैंस के बछड़ा जन्म

  • पहला IVF बछड़ा बन्नी नस्ल की भैंस के छह बार IVF गर्भाधान के बाद पैदा हुआ।
  • यह प्रक्रिया सुशीला एग्रो फार्म्स के किसान विनय एल. वाला के घर जाकर पूरी की गई।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने 15 दिसंबर, 2020 को गुजरात के कच्छ इलाके के दौरे के समय बन्नी भैंस की नस्ल के बारे में चर्चा की थी, उसके अगले ही दिन, यानी 16 दिसंबर को बन्नी भैंसों के अंडाणु निकालने (ओपीयू) और उन्हें विकसित करके भैंस के गर्भशय में स्थापित करने (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन-आईवीएफ) की प्रक्रिया शुरू करने कि योजना बनाई गई।

पात्रे निषेचन या इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF)

  • यह निषेचन की एक कृत्रिम प्रक्रिया है जिसमें किसी महिला के अंडाशय से अंडे निकालकर उसका संपर्क द्रव माध्यम में शुक्राणुओं से (शरीर के बाहर किसी अन्य पात्र में) कराया जाता है।
  • इसके बाद निषेचित अंडे को महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है, इस तरह गर्भ-नलिकाओं का उपयोग नहीं होता है।
  • यह महिलाओं में कृत्रिम गर्भाधान की सबसे प्रभावी तकनीक मानी जाती है।
  • आमतौर पर इसका प्रयोग तब करते हैं जब महिला की अण्डवाही नलियाँ बन्द होने हैं या जब मर्द बहुत कम शुक्राणु (स्पर्म) पैदा कर पाता है।
  • इस प्रक्रिया में कई बार दूसरों द्वारा दान में दिए गए अण्डों, दान में दिए वीर्य या पहले से फ्रोजन एमबरायस का उपयोग भी किया जाता है।
  • दान में दिए गए अण्डों का प्रयोग उन स्त्रियों के लिए किया जाता है है जो कि अण्डा उत्पन्न नहीं कर पातीं।
  • इसी प्रकार दान में दिए गए अण्डों या वीर्य का उपयोग कई बार ऐसे स्त्री पूरूष के लिए भी किया जाता है जिन्हें कोई ऐसी जन्मजात बीमारी होती है जिसका आगे बच्चे को भी लग जाने का भय होता है।

इस तकनीक की सफलता दर को प्रभावित करने वाली चीज़ों में शामिल है-

  1. अनुर्वरकता का कारण
  2. तकनीक का प्रकार
  3. अण्डा ताज़ा है या फ्रोज़न
  4. एमब्रो (भ्रूण) ताज़ा है या फ्रोज़न

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