भारत की GDP वृद्धि :चुनौतियां और अवसर
- नई सरकार के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि उच्च विकास का लाभ निम्न आय वर्ग तक पहुंचे
- भारत के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था, वास्तव में, इसने बाजार की उम्मीदों को पार कर लिया है, वर्ष 2023-24 में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकिवर्ष 2022-23 में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मुख्य बिंदु
- यह ध्यान देने वाली बात है कि वर्ष 2023-24 में वृद्धि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान 7.6 प्रतिशत से काफी अधिक है।
- यद्यपि समग्र सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि प्रभावशाली है, फिर भी इस वर्ष वृद्धि की स्थिरता का अनुमान लगाने के लिए आंकड़ों की कुछ बारीकियों को समझना महत्वपूर्ण है।
- एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु वर्ष 2023-24 में GDP और GVA वृद्धि के बीच 1 प्रतिशत अंक का तीव्र अंतर है।
- इसका मुख्य कारण शुद्ध करों में तीव्र वृद्धि (उच्च कर संग्रह और कम सब्सिडी के कारण) है। इससे GDP वृद्धि को बढ़ाने में भी मदद मिली है।
- यदि हम क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो, जैसा कि अपेक्षित था, पिछले वर्ष खराब मानसून के कारण, समग्र कृषि मूल्य संवर्धन वृद्धि धीमी रही है।
- कम इनपुट कीमतों के समर्थन से, विनिर्माण GVA ने वर्ष 2023-24 में 9.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ स्वस्थ सुधार दिखाया है।
- जबकि सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रही है।
- निर्माण क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और इसमें 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
सकल घरेलू उत्पाद व्यय पक्ष:
- यदि हम व्यय पक्ष से सकल घरेलू उत्पाद के विभाजन को देखें, तो हम पाते हैं कि समग्र सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि बहुत व्यापक आधारित नहीं है।
- अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तंभ, निजी उपभोग, वर्ष 2023-24 में 3.8 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के साथ बढ़ा है। यह पिछले दो दशकों (महामारी वर्ष संकुचन को छोड़कर) में सबसे धीमी खपत वृद्धि दर है।
- भारतीय अर्थव्यवस्था का दूसरा स्तंभ निवेश 9 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। अर्थव्यवस्था में निवेश का नेतृत्व मुख्य रूप से सरकारी क्षेत्र ने किया है।
- केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय वर्ष 2023-24 में 28 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि के साथ बढ़ा है।
विकास एवं निर्यात:
- कमजोर वैश्विक विकास के कारण भारत की अर्थव्यवस्था का तीसरा स्तंभ धीमा पड़ गया है।
- यद्यपि भारत का सेवा निर्यात अच्छा बना हुआ है, किन्तु वस्तु निर्यात को विशेष रूप से वैश्विक मंदी का दंश का सामना हुआ है।
- हम उम्मीद कर सकते हैं कि भारत की GDP वृद्धि दर में नरमी आएगी। हालांकि, इस साल यह करीब 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
- विकास की गति को कायम रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू निजी उपभोग में सुधार होगा।
- जबकि उच्च आय वर्ग खर्च कर रहा है, निम्न आय वर्ग उच्च मुद्रास्फीति और कम वेतन वृद्धि के बीच सतर्क बना हुआ है।
- पिछले वर्ष खराब मानसून के कारण ग्रामीण मांग भी कमजोर रही थी।
- इस वर्ष सामान्य मानसून की उम्मीद के साथ, हम ग्रामीण उपभोग मांग में पुनरुद्धार की उम्मीद कर सकते हैं।
- ग्रामीण उपभोग में सुधार के लिए खाद्य मुद्रास्फीति में कमी एक अन्य पूर्वापेक्षा होगी।
- रोजगार परिदृश्य में सुधार भी उपभोग पुनरुद्धार के लिए एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
- असंगठित क्षेत्र में रोजगार की स्थिति में सुधार भी महत्वपूर्ण होगा।
- सतत विकास गति के लिए निजी पूंजीगत व्यय चक्र में तेजी एक अन्य महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
- निजी क्षेत्र में निवेश के प्रति बढ़ती इच्छा दिखाई दे रही है, जैसा कि घोषित निवेश परियोजनाओं पर CMIE के आंकड़ों से पता चलता है।
- बेशक, निजी निवेश को सार्थक रूप से बढ़ाने के लिए उपभोग मांग में निरंतर पुनरुद्धार सबसे महत्वपूर्ण होगा।
वैश्विक परिदृश्य
- वैश्विक विकास परिदृश्य में सुधार के साथ ही भारत के निर्यात में भी सुधार होने की संभावना है।
- हालाँकि, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण आपूर्ति में बाधा उत्पन्न होने का खतरा बना हुआ है।
- वैश्विक कमोडिटी कीमतों, विशेष रूप से औद्योगिक धातुओं की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी, उच्च इनपुट लागत के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

