दो साल के अंतराल के बाद पुष्कर पशु मेला शुरू
- COVID-19 महामारी के कारण, पुष्कर में पशु मेला आयोजित नहीं हो सका, लेकिन इस वर्ष राज्य सरकार ने इसकी अनुमति दे दी है।
- मेले में 235 ऊंटों सहित 415 से अधिक मवेशी भाग लेंगे।
- विदेशी पर्यटकों पर प्रतिबंध के साथ मेले के सुरक्षित संचालन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं।
पुष्कर पशु मेला
- यह पुष्कर ऊंट मेला या कार्तिक मेला के रूप में भी जाना जाता है।
- यह मेला कार्तिक के हिंदू कैलेंडर महीने से शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा पर समाप्त होता है।
- यह भारत के सबसे बड़े ऊंट, घोड़े और पशु मेलों में से एक है।
- पशुओं के व्यापार के अलावा मेला सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए भी प्रसिद्ध है और प्रतियोगिताओं में नृत्य, ""मटका फोड"", ""सबसे लंबी मूंछें"" प्रतियोगिता, ऊंट दौड़ आदि शामिल हैं।
राजस्थान में अन्य पशु मेले
कोलायत पशु मेला, बीकानेर
- इसे कपिल मुनि मेले के नाम से भी जाना जाता है।
- भैंस, घोड़े, ऊंट और अन्य मवेशियों के व्यापार के लिए सबसे अच्छी जगह के रूप में जाना जाता है।
- यह दिसंबर माह में आयोजित होने वाली बीकानेर जिले का सबसे बड़ा पशु मेला हैं।
ऊंट बीकानेर मेला
- यह हर साल जनवरी के महीने में होता है।
- यह त्यौहार स्थानीय लोगों को अपने ऊंटों की दौड़ का अवसर प्रदान करता है।
- यहां ऊँट नृत्य, ऊँट कलाबाजी, उत्तम-सज्जित ऊँट, ऊँट का दूध देहना आदि रोचक गतिविधियाँ होती हैं।
गोगामेड़ी मेला, गंगानगर
- यह अगस्त और सितंबर के महीनों में प्रतिवर्ष मनाया जाता है।
- यह स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों द्वारा पशुधन, हस्तशिल्प, गाँव की फसल और आकर्षक हस्तशिल्प की बिक्री के लिए प्रसिद्ध हैं।
झालावाड़ पशु मेला
- इसे चंद्रभागा मेला भी कहा जाता है।
- इसे हर साल राजस्थान के झालावाड़ जिले में चंद्रभागा नदी के तट पर आयोजित किया जाता है।
- यह 27-29 नवंबर तक कार्तिक पूर्णिमा के अंतिम दिन मनाया जाने वाला सबसे लोकप्रिय मेला हैं।
गंगापुर पशु मेला
- यह राजस्थान में भीलवाड़ा के पास गंगापुर में होता है।
- गंगापुर भीलवाड़ा-उदयपुर रोड पर स्थित है और इसका नाम देवी गंगा के मंदिर के नाम पर रखा गया है।
- भारत के अन्य कम ज्ञात पशु मेले करौली पशु मेला, नलवारी पशु मेला, कुंडा मेला, रामदेव पशु मेला और कुलकुंडा पशु मेला हैं।
नागौर मेला
- यह हर साल जनवरी और फरवरी के महीनों के दौरान आयोजित किया जाता है।
- मेले के आकर्षण: पशु मेला और बाजार जहां मेथी और मिर्च बेचा जाता हैं।
- नागौर में आयोजित होता हैं, जो जोधपुर से बीकानेर की ओर 137 किमी दूर स्थित है।
बेनेश्वर मेला
- हर साल जनवरी-फरवरी के महीनों में शिवरात्रि के अवसर पर आयोजित किया जाता है।
- यह आदिवासी उत्सव माही और सोम नदियों के तट पर आयोजित किया जाता है।
